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मोबाइल फोन रेडिएशन के ख़तरे

भारत में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या और मोबाइल फोन के स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने की क्षमता में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। कुकरमुत्ते की तरह रोज़ पैदा होते मोबाइल टावरों की वजह से रेडिएशन का ख़तरा भी बढ़ा है। देशभर में मोबाइल टावर घरों के ऊपर, घर के आसपास सिर उठाए खड़े हैं। साल 2010 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ)की शोध में खुलासा हुआ है कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का ख़तरा है। ऐसे में अगर मोबाइल फोन जनित रेडिएशन से आम आदमी को अगर नुकसान की गुंजाइश है, तो इसका अर्थ लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना होगा। इसलिए मोबाइल रेडिएशन के गंभीर संकट को समझना और इस बारे में जागरुकता बेहद ज़रूरी है।

भारत सरकार ने भी मोबाइल फोन रेडिएशन के ख़तरे को स्वीकार किया है। मोबाइल फोन रेडिएशन के ख़तरनाक प्रभावों के संबंध में मंत्रालय की अंतर्रकमेटी रिपोर्ट को दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने मंजूर कर लिया है। डब्लूएचओ की तर्ज पर इस रिपोर्ट का कहना है कि रेडिएशन से होने वाले प्रभावों में सिर में जलन और गुदगुदी, थकान, नींद न आना, काम में ध्यान न लगना, कानों का बजना, याद्दाश्त में कमी, सिरदर्द, पाचन में गड़बड़ी और असामान्य ह्दयगति जैसे लक्षण शामिल हैं। इस सिफारिशों को मानते हुए डीओटी जल्द ही मोबाइल फोन विक्रेताओं के लिए नये मानक तय करने वाला है। जल्द ही सरकार मोबाइल फोन निर्माताओं को बिक्री के वक्त उपभोक्ताओं के लिए स्पेसेफिक एबसॉर्पशन रेशिओ (एसएआर) की जानकारी मुहैया कराने के आदेश दे सकती है।

https://sites.google.com/site/allaboutmobilephoneradiation/bulletin

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