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आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स और जीवन

पिछले हफ्ते हमने गूगल कर के बारे में लिखा था। हमारा मानना है कि “टेक्नोलॉजी के मामले में अभी बहुत कुछ हासिल नहीं हो पाया है। यानि कि ऐसे रोबोट जो स्वयं परिस्थितियों का अनुमान लगा कर, निर्णय लें, और उसका कार्यान्वयन कर सकें- अभी नहीं बन पाए हैं।”
परिस्थितियाँ बेहद भयानक हो सकती हैं यदि आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स यानी कि कंप्यूटर को ही स्वयं सोच कर निर्णय लेना पड़े ।
टेस्ला और स्पेस x जैसी कंपनियों के स्थापक एलोन मस्क ने हाल ही में निक बोस्ट्रॉम की सुपर-इंटेलिजेंस: पाथ्स, डेंजरस एंड स्ट्रेटेजीज पढ़ी । उनका मानना है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स को ले कर बेहद सावधानी बरतना जरूरी है। इसमें न्यूक्लियर हथियारों से अधिक खरतनाक होने की संभावना हो सकती है ।
आप नहीं मानते? वॉल -ई  मूवी में देखें  जब शिप का ऑटोमेटेड कप्तान शिप का पूरा दायित्व ले लेता है तो उसकी समझ उतनी ही होती है जीती उसमे प्रोग्राम के द्वारा फीड की गयी है। उसके समक्ष जीवन का महत्व (यानी शिप के असली कप्तान और वॉल-ई का) नहीं रह जाता ।

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