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कानों को नुकसान पहुंचा सकता है तेज़ आवाज़, जानिए बचने के 4 तरीके

January 10, 2015 Leave a comment Go to comments
हेडफ़ोन पर संगीत का मज़ा लेती सोनाक्क्षी सिन्हा; चित्र साभार सोनाक्क्षी सिन्हा के ट्विटर पोस्ट से

हेडफ़ोन पर संगीत का मज़ा लेती सोनाक्क्षी सिन्हा; चित्र साभार सोनाक्क्षी सिन्हा के ट्विटर पोस्ट से

तेज़ आवाज़ कान को पर्दों को हानि पहुंचा सकता है या नहीं यह काफ़ी समय से चर्चा का विषय बना रहा है। एप्पल आईपैड और अन्य म्यूज़िक गैजेट के आने के बाद से इस चर्चा में तेज़ी ही आई है।

हाल के वर्षों में फोन और टेबलट पर गाना सुनना जैसे एक आम बात बन गई है। ऐसे में यह जानना ज़रुरी हो जाता है कि क्या ऊंची आवाज़ में म्यूज़िक (संगीत) सुनने पर कानों के पर्दों को वाकई नुकसान पहुंच सकता है? यदि हां, तो इससे कैसे बचा जाए।

2014 में डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संस्थान) द्वारा प्रकाशित इयर केयर मैनुअल (कान की देखभाल विषय पर पुस्तिका) में बताया गया है कि ऊंची आवाज़ कान के पास बजने से श्रवणशक्ति पर असर पड़ सकता है। इस मैनुअल के अनुसार “कान के पास बजनेवाले तेज़ संगीत का समय बढ़ने पर बहरेपन का ख़तरा भी बढ़ जाता है। ऐसा देखा गया है कि, इयरफ़ोन या हेडफ़ोन पर अधिकतम वोल्यूम पर 5 मिनट से अधिक देर संगीत सुनने पर श्रवणशक्ति पर बुरा असर पड़ता है। इससे बचने के लिए संगीत सुनते वक्त के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लिया जाना उचित है।” पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

2014 में गार्डियन अख़बार में छपे एक रिपोर्ट में कान पर तेज़ ध्वनि के असर को विस्तार से समझाया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार “तेज़ आवाज़ से कान के अंदरुणी हिस्से के सूक्ष्म बालों, जिन्हें स्टेरियोसिलिका कहते हैं, उन्हें क्षति पहुंचाता है- जिसके कारण बहरेपन का ख़तरा पैदा हो जाता है। तेज़ ध्वनि से स्टेरियोसिलिका में कंपन पैदा होता है, जिससे उनमें संचारित वोल्टेज में बदलाव आता है। इस बदलाव की ख़बर तंत्रिकाएं ब्रेन तक पहुंचाती हैं।” इस रिपोर्ट के अनुसार, स्टेरियोसिलिका में लगातार कंपन पैदा कर वोल्टेज में बदलाव करने से बहरापन हो सकता है।

ऊंची ध्वनि से कानों को नुकसान पहुंचता है जानते हुए भी सफ़र के दौरान या काम करते समय संगीत सुनना आज हमारी आदत बन चुका हैं। ऐसे में क्या करें कि हमारे कानों को कोई नुकसान ना पहुंचे। हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ तरीके –

1.  85 डेसिबल (ध्वनि को डेसिबल में मापा जाता है) से अधिक उंची ध्वनि में संगीत ना सुनें।

पोरटेबल स्पीकर्स

पोरटेबल स्पीकर्स

2. मोबाइल या टैबलेट पर संगीत सुनने की बजाय अपने साथ छोटे ब्लूटूथ या दूसरे स्पीकर ले रखें, और इनका इस्तेमाल करें।

3. काफ़ी देर तक हेडफोन लगा कर संगीत ना सुनें, बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। ऑस्टियोपैथिक पेडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) डॉ जेम्स इ, फॉय के अनुसार एक दिन में एमपी3 प्लेर या किसी भी अन्य गैजेट पर संगीत 60 मिनट से अधिक देर नहीं सुनना चाहिए। (स्त्रोत: अमरिकन ऑस्टियोपैथिक एसोसिएशन)

4. क्या आपने ऑटोमैटक वाल्यूम लेवलर के बारे में सुना है? यह गैजेट ध्वनि के प्रेशर को एक निश्चित सीमा के अंदर रखने में मदद करता है। कई कारों में यह सुविधा होती है, जहां ये लेवलर कार की गति के साथ संगीत या रेडियो की ध्वनि को घटाता या बढ़ाता है।

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