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गूगल को चुनौति देते हुए सैमसंग ने लाँच किया टाइज़न ज़ी1

January 18, 2015 Leave a comment Go to comments
सैमसंग टाइज़न ज़ी1

सैमसंग टाइज़न ज़ी1

साल 2015 के शुरुआत से ही सैमसंग ने अपने जलवों की छटा बिखेरनी शुरु कर दी है। अन्तर्राष्ट्रीय कन्ज़्यूमर इलोक्ट्रोनिक शो में आकार बदलने वाला टीवी, कर्वड टीवी और खास म्यूज़िक गैजैट पेश करने के बाद इस दक्षिण कोरियाई कंपनी ने गूगल, शियोमी और अन्य स्मार्टफोन बनानेवली कंपनियों को सामने बड़ी चुनौति पेश की है – टाइज़न ज़ी1।

पिछले हफ्ते सैमसंग ने अपना पहला और सस्ता फोन टाइज़न ज़ी1 लाँच किया। हालांकि स्पेक्स की दृष्टि से यह नया 4-ईंच का फोन कुछ बेहद खास ले कर नहीं आता, पर इसकी खास बात है एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम (जिसे हम ओएस भी कहते हैं) जिसे टाइज़न कहा जाता है। यह ओएस सैमसंग का खुद का तैयार किया ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसको आधार बना कर सैमसंग ने पिछले वर्ष गैलैक्सी गियर स्मार्टवॉच मार्केट में लाँच किया था।

गूगल को खुली चुनौती है सैमसंग का टाइज़न  

जिस प्रकार एंड्राइड वन को हम फोन की बजाय गूगल की रणनीति के रुप में देख सकते हैं, उसी प्रकार टाइज़न को फ़ोन की बजाय सैमसंग की रणनीति के रूप में देखा जाना बेहद ज़रूरी है।

एप्पल के वर्लडवाइड डेवेलेपर कॉनफेरेन्स में एप्पल के सीईओ, टिम कुक ने एंड्राइड की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि एंड्राइड संसार का सबसे बड़ा ओएस है ज़रुर, पर काफ़ी सारे उपभोक्ता पुराने ओएस वर्ज़न पर काम करते हैं ना कि नए वर्ज़न पर। केवल 9 प्रतिशत उपभोक्ता ही एंड्राइड किटकैट पर हैं, जबकि एप्पल आईउएस पर त़रीबन 89 प्रतिशत आईफ़ोन उपभोक्ता हैं, कुक ने बताया। (साभार: बिज़नेस इनसाइडर)

कुक की कही बात ग़लत नहीं थी। गूगसल ने एंड्राइड ओएस लाँच कर मुफ्त मुहैया तो कर दिया, दिया परन्तु कंपंनियों द्वारा सस्ते फ़ोन अलग-अलग वर्ज़न के ओएस के साथ लाँच किए जा रहे थे, जिनके अपडेट्स देने में सबसे अधिक परेशानी गूगल को ही हो रही थी। साल 2014 में सस्ते फ़ोन के ओएस वर्ज़न में समानता लाने की दूरदृष्टि रखते हुए एंड्राइड वन को लाँच किया।

गौर करें कि सैमसंग गूगल के एंड्राइड ओएस का इस्तेमाल अपने फोन में करती है। सैमसंग नोट, गैलैक्सी, एज स्मार्टफोन और गैलैक्सी टैबलैट एंड्राइड ओएस पर ही चलते हैं।

गूगल के एंड्राइड के साथ सैमसंग ने स्मार्टफोन क्षेत्र में अबाध्य तरक्की की है और यह आज दुनिया के सबसे अधिक अपनाया जानेवाला फ़ोन कंपनी बन चुका है। जहां एक ओर यह तरक्की हुई है, वहीं इसके साथ सैमसंग की निर्भरता गूगल पर बढ़ी है। परन्तु रिश्ते हमेशा थोड़े टिकते हैं?

इसलिए ज़रूरी था टाइज़न

डिज़िटल ट्रेन्डस् की रिपोर्ट की मानें तो, सैमसंग एप्पल की भांति बड़ा और आत्मनिर्भर बनना चाहता है, परन्तु ऐसा करने का लिए इसे सबसे पहले गूगल के गराज से निकलने की ज़रुरत है। 2013 की एक फोर्बस् रिपोर्ट के अनुसार धीरे-घीरे गूगल ने एंड्राइड पर अपना कंट्रोल बढ़ा लिया है।

मोबाइल मार्केट पर कब्ज़ा बनाए रखने के लिए बेहद ज़रुरी है अपना ओएस लाँच करना और अपना स्वयं का एप स्टोर होना जहां आप एप्स बेच सकें। टाइज़न इस दिशा में सैमसंग का तीसरा प्रयास है।

बाडा ऑपरेटिंग सिस्टम

बाडा ऑपरेटिंग सिस्टम

जी हां, मैं टाइज़न को तीसरा प्रयास कह रही हूं! सैमसंग का प्रथम प्रयास था बाडा- कंपनी का अपना ओएस जो साल 2009 के डिसेम्बर में लाया गया (इस ओएस के साथ पहला फ़ोन 2010 के मोबाइल वर्लड कांफेरेन्स में लाँच किया गया।)

सैमसंग की कई कोशिशों को बावज़ूद यह ओएस कुछ खास धूम नहीं मचा सका। 2013 के फरवरी में सैमसंग ने घोषणा की कि वह आगे बाडा ओएस पर काम नहीं करेगा। बाद में सैमसंग ने बाडा को टाइज़न में मिलाने की कोशिश की।

इसी महीने सैमसंग ने अपने नए टचस्क्रीन रेक्स फीचर फ़ोन लाँच किए जो दिखने में एंड्राइड की तरह थे परन्तु बाडा पर काम नहीं करते थे। हालांकि यह फ़ोन नोकिया आशा फ़ोन के प्रतिद्वन्दी के रूप में उतारे गए थे, ये ज़ावा पर आधारित थे और सैमसंग टचविज़ इन्टरफेस का इस्तेमाल करते थे।

खास तौर पर भारतीय मार्केट को नज़र में रख कर बनाए गए इन फ़ोनों ने कोई बेहद खास सफलता हासिल नहीं की।

इस प्रकार टाइज़न सैमसंग का इस दिशा में तीसरा बड़ा प्रयास है।

क्या है टाइज़न मास्टर प्लान?

साल 2008-2009 की बात करें तो फ़ोन ही सब कुछ था, जो मार्केट में था। स्मार्टटीवी और स्मार्टवॉच दूर-दूर तक निगाहों में नहीं थे। टैबलेट क्षेत्र में तरक्की मिल सकेगी इसके कोई ठोस आधार नहीं थे। ओएस की बात करें तो एंड्राइड था जो गूगल ने मुफ्त मुहैया कराया था, एप्पल और ब्लैकबैरी किसी सूरत में अपना ओएस सैमसंग के साथ नहीं बांटते। माइक्रोसोफ्ट के पास फ़ोन के लिए कुछ खास था नहीं।

टाइज़न ऑपरेटिंग सिस्टम

टाइज़न ऑपरेटिंग सिस्टम

ऐसे में सैमसंग की एंड्राइड पर निर्भरता लाज़मी हो गई थी। पर पिछले दो वर्षों से स्थितियों में बदलाव आया है। स्मार्टफ़ोन बनानेवालों में (देशी कंपंनियों के आने के बाद से खास तौर पर) अभूतपूर्व प्रतिद्वंदिता देखने को मिल रही है। ऐसे में अपनी साख बनाए रखने के लिए ज़रुरी है कि सैमसंग अपना खुद का ओएस बनाए, जिस पर उसका खुद के कंट्रोल हो।

सैमसंग ने प्रथम टाइज़न ओएस को आधार बनाते हुए अपना स्मार्टवॉच लाँच किया उसके बाद स्मार्ट टीवी और अब एक स्मार्टफ़ोन। जहां स्मार्टफ़ोन क्षेत्र में पैठ बना पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, स्मार्टवॉच और स्मार्ट टीवी के क्षेत्र में आगे बढ़ना सैमसंग के लिए काफ़ी आसान साबित होने के आसार हैं।

एंड्राइड के जैसा लुक, सैमसंग का जांचा-परखा टचविज़ इन्टरफ़ेस, एंड्राइड एप्स चला सकने की क्षमता- इन सबके साथ सैमसंग उपभोक्ता को वही अनुभव प्रदान करने की स्थिति में है, जो सैमसंग के एंड्राइड-आधारित गैलैक्सी फ़ोन के साथ मिलता है। तभी तो यह सैमसंग का मास्टर प्लान-सा प्रतीत होता है, जिस पर सैमसंग पिछले कमसकम 5-6 सालों से काम कर रहा है।

मिलें टाइज़न ज़ी1 से 

टाइज़न ज़ी1 एक 4-इंच डिस्पले स्क्रीन वाला फ़ोन है जिसका जिसका डिस्पले रिज़ोल्यूशन 800X480 पिक्सल्स है। इसमें दो सिम कार्ड एक साथ लगाए जा सकते हैं और यह फ़ोन दो-कोर (यानि ड्यूअल-कोर) प्रोसेसर पर काम करता है जिसकी स्पीड 1.2GHz है।

फ़ोन में 768MB का रैम है, 4GB की मेमरी है जिसे आप बढ़ाकर 32GB तक कर सकते हैं। इसमें 3 मेगापिक्लस एवं 0.3 मेगापिक्सल के दो कैमरे हैं। कैमरे में 1,500mAh की बैटरी है और टाइज़न ओएस पर इस फ़ोन पर आप एंड्राइड एप्स, यानि कि गूगल के प्ले स्टोर से डाउनलोड किए एप्स भी चला सकते हैं।

माइक्रोमैक्स कैनवस ए वन

माइक्रोमैक्स कैनवस ए वन

क्या है एंड्राइड वन में? 

चूंकि एंड्राइड वन फ़ोन अलग-अलग कंपनियों ने लाँच किए हैं, परन्तु यह फ़ोन गूगल हार्डवेयर निर्देशिका पर आधारित हैं। अतः सभी एंड्राइड वन फ़ोनों के बारे में ना लिखकर, किसी एक कंपनी के एंड्राइड वन फ़ोन के बारे में लिखना ठीक होगा।

माइक्रोमैक्स के कैनवस ए वन की बात करें तो, यह एक 4.5इंच का फ़ोन है जिसमें 480×854 का डिस्पले रिज़ोल्यूशन है। फ़ोन चार-कोर प्रोसेसर पर काम करता है जिसकी स्पीड 1.3GHz है और इसमें 1GB का रैम और 4GB की मेमरी है जिसे आप बढ़ाकर 32GB तक कर सकते हैं। इसमें 5 मेगापिक्लस एवं 2 मेगापिक्सल के दो कैमरे हैं। कैमरे में 1,700mAh की बैटरी है।

टाइज़न ज़ी की तुलना में एंड्राइड वन फ़ोन थोड़ा महंगा है। गौर करें जहां सैमसंग ने टाइज़न ज़ी की कीमत रखी है 5,700 रुपये, वहां गूगल एड्रांइड वन की कीमत कुछ 6,500 रुपये के आस-पास है।

कौन है बेहतर- सैमसंग टाइज़न ज़ी1 या माइक्रोमैक्स का एंड्राइड वन?

दोनों फ़ोन के स्पेक्स की तुलना करें तो टाइज़न ज़ी पीछे छूटता-सा लगता है, परन्तु क़म कीमत इसकी ख़ास पहचान है, जो लोगों को आकर्षित अवश्य करेगा।

देखना है कि नए लाँच होनेवाले फ़ोन के साथ टाइज़न ज़ी कैसा जवाब देगा। उम्मीद की जा रही है, कि एड्रांइड वन की आने वाली सीरिज़ (जो मार्च खत्म होने से पूर्व लाँच हो जाएगी) काफ़ी सस्ती होगी, और टाइज़न ज़ी को सही जवाब दे सकेगी।

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