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कैसे होंगे साल 2015 में लांच होनेवाले स्मार्टफ़ोन? जानिए भारतीय बाज़ार के 9 रुझान

January 28, 2015 Leave a comment Go to comments
Apple iPhone

एप्पल आईफ़ोन

भारतीय स्मार्टफ़ोन बाज़ार में क्या होंगे साल 2015 के लिए रुझान? किस प्रकार की नई तकनीक के इर्द-गिर्द आएंगे नए फ़ोन, और क्या उम्मीद लगा सकते हैं हम स्मार्टफ़ोन बनानेवाली कंपनियों से?

भारत में स्मार्टफ़ोन बाज़ार बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। कंपनियां हर महीने नए-नए उत्पाद और नई तकनीक लिए धांसू स्मार्टफ़ोन ला रही हैं जिन्हें देख कर लगता है कि तकनीकी क्षेत्र में हम कहीं आगे निकल आए हैं। बहुत तेज़ गति से नए मानदंड बनाए जा रहे हैं और उससे भी ज़्यादा तेज़ी से इन्हें तोड़ कर नए रिकार्ड कायम किए जा रहे हैं।

कैसा रहा 2014?

2014 में हमने देखा इस किनारे से उस किनारे तक के डिस्पले फ़ोन (edge-to-edge display), कर्वड फ़ोन, चार-कोर वाले तेज़ चलने वाले फ़ोन, बेहतरीन कैमरा क्वालिटी जो डीएसएलआर को भी मात दे दे और सबसे ज़रुरी बात- बेहद सस्ते दाम। लगभग हर स्मार्टफ़ोन बनानेवाली कंपनी ने अपने उत्पादों के लिए भारत को महत्वपूर्ण मार्केट माना।

फ़ोन की बिक्री में जहां एक ओर खासी तेज़ी आई, वहीं उनके दामों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। मार्केट में सस्ते फ़ोन जैसे मोटो ई, शियोमी रेडमी 1S, मोटो जी और एप्पल आईफ़ोन छाए रहे।

साल की शुरुआत में ही मोटोरोला ने मोटो ई, जी और एक्स के साथ ने भारत में धमाकेदार एन्ट्री की। मोटो ई के साथ मोटोरोला ने अपने विरोधियों नई चुनौतीकायम की (2014 की शुरूआत में मोटोरोला गूगल के ही ख़ेमे में थी।)।

उधर एंड्रॉएड के वर्जन में समानता लाने के उद्देश्य से गूगल ने भारत में देशी कंपनियों के साथ मिलकर लांच किया एंड्रॉएड वन। हालांकि एंड्रॉएड वन ने कोई ख़ास रिकार्ड तो नहीं बनाया परन्तु सस्ते फ़ोनों की फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया।

इसके बाद, एक के बाद एक धड़ाधड़ सस्ते फ़ोन बाज़ार में उतारे गए। आलम ये कि मोज़िला ने भी 2,000 रुपये में स्मार्टफ़ोन लाकर खलबली-सी मचा दी। रिकार्डतोड़ सफ़लता हासिल नहीं करने के बावजूद इस फ़ोन को कामयाब माना गया, क्योंकि इतने सस्ते दाम पर अभी तक कोई दूसरी कंपनी फ़ोन नहीं ला पाई है।

सरकार बदली, बदला बाजा़र

कांग्रेस को टा-टा बाय-बाय करते हुए देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के हाथों देश की बागडोर सौंप दी। सरकार से व्यापार बढ़ाने की ओर ख़ास तव़ज्जो का भरोसा पाकर कंपंनियों में भी उत्साह आया।

गांव-देहात से ले कर शहर-कस्बों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए फ़ोन बनानेवाली और अन्य कंपनियां लग पड़ी। गूगल और फेसबुक ने भारत में इंटरनेट के विकास का रो़डमैप बनाया, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले। ई-कॉमर्स में भारी इन्वेस्टमेन्ट फंड की घोषणाएं हुई।

केन्द्र सरकार ने बाज़ार के ग्रोथ में तेज़ी नहीं आ पाने की वजह – स्पेक्ट्रम की कमी, जैसा कि कंपनियों का दावा था- का जवाब ख़ोज निकाला। 3जी और 4जी स्पेक्ट्रम की नीलामी जल्द ही होनेवाली है। (हम अभी इस बहस को नहीं छेड़ेंगे कि अधिक बेसप्राइज़ रखने पर बाजा़र में नुक़सान होने के अंदेशा है या नहीं।) इतना ही नहीं डिफेन्स स्पेक्ट्रम को भी अलग कर लेने की कोशिश पर काम चल रहा है।

मोटे तौर पर कहना ग़लत ना होगा कि फ़ोन के बाज़ार के साथ, इसे ढ़ंग से चला सकने के अन्य विषयों पर भी नज़र गई है,जिसके नतीजतन साल 2015 में स्मार्टफ़ोन बाजा़र तेज़ी केवल बढ़ेगी, घटेगी नहीं।

भारत के बाज़ार के विषय में क्या अटकलें लगाई जा सकती हैं 2015 के लिए?

विश्व के चौथी बड़ी रिसर्च संस्थान, जीएफके के पूर्वानुमान अनुसार विश्व के दूसरे सबसे तेज़ गति से प्रगति कर रह भारत में साल 2014 में स्मार्टफ़ोन की बिक्री में आई तेज़ गति थमने के कोई आसार नहीं हैं। 2014 के मुकाबले 2015 में बिक्री में 18 प्रतिशत की बढ़त होने का अनुमान है। (पढ़ें रिपोर्ट)

परन्तु देशों की रैंकिंग में बदलाव नज़र आ सकता है । पिछले साल चीन विश्व का सबसे तेज़ गति से प्रगति करने वाला देश रहा था। 2015 में हालात अलग होने की अटकलें हैं, जिसके चलते भारत विश्व का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला देश बन जाएगा। जीएफके की रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत में यूएसडॉलर 30.0 के तकनीकी साजोसामान की बिक्री हुई है जबकि चीन में 199.0 यूएसडॉलर की। साल 2015 में उम्मीद है कि भारत में 34.8 यूएसडॉलर के तकनीकी उत्पादों की बिक्री होगी जबकि चीन में 200.8 यूस डॉलर की।

जैसै कि मैंने पहले कहा इस साल स्मार्टफ़ोन बाजा़र तेज़ी केवल बढ़ेगी और नए एवं बेहतर उत्पाद उपभोक्ताओं को रिझाने के लिए लाए जांगे। कई सारे नए, नई तकनीक दिखाते उत्पाद लांच होने को पहले ही तैयार खड़े हैं। परन्तु क्या-क्या दिखेगा हमें भारतीय बाजा़र में, साल 2015 में। क्या होगी इस इंडस्ट्री की दिशा? मैं आपको बताने जा रही हूं कि इस साल क्या नया आ सकता है बाजा़र में और क्या हो सकते हैं रूझान?

Google Nexus 6

गूगल नेक्सस 6

1. बड़े और बेहतर डिसप्ले

 

साल 2014 के लिए हमारा अनुमान था, कि 5-इंच स्क्रीन वाले फ़ोनों की भरमार रहेगी। यह ट्रेंड 2015 में भी जारी रहेगा।

गौर करें तो एप्पल, जो अब 4-इंच के आईफ़ोन 5 और 5S लेकर आया था, साल 2014 में 4-इंच से आगे बढ़कर 4.7-इंच और 5.5-इंच के दो आईफ़ोन- 6 और 6प्लस बाजा़र में उतार चुका है। 4.95-इंच के नेक्सस 5 से आगे बढ़ते हुए गूगल ने 5.93 का नेक्सस 6 लांच किया। इसके साथ ही बहुतों ने पिछले साल 5-इंच या 4.7-इंच के स्क्रीनवाले फ़ोन लांच किए।

आइडीसी की सितम्बर 2014 की रिपोर्ट को देखें तो वैश्विक बाज़ार में वर्ष 2014 में 1750 लाख और वर्ष 2015 में 3180 लाख फैबलेट (5.5-इंच से 7-इंच तक की स्क्रीन साइज़) की बिक्री का अनुमान था।

केवल स्क्रीन के साइज़ में ही नहीं वरन् डिसप्ले की क्वालिटी में भी बेहतरी की उम्मीद है इस साल। सस्ते फ़ोन, जिन पर अभी WVGA (800 x 480 पिक्सल) या HD (1280 x 720 पिक्सल) का डिसप्ले रिज़ोल्यूशन रहता है, उन पर इस साल के खत्म होने से पहले FullHD (1920 × 1080 पिक्सल) डिसप्ले रिज़ोल्यूशन आ जाएगा।

अधिकतर सस्ते फ़ोन पर स्क्रीन प्रोटेक्शन के बिना ही आते हैं, परन्तु 2015 में इसके भी बदलने का आसार हैं। जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी कंपनियां मज़बूत फ़ोन लांच करने से पीछे नहीं हटेंगी।

मंहगे फ़ोन की बात करें तो 2014 में 2K (2048 × 1536 पिक्सल) के फो़न अधिक देखने को नहीं मिले। जहां सैमसंग ने अपना गैलैक्सी नोट 4 2K डिस्पले के साथ उतारा, वहीं एलजी ने जी3 और लेनोवो ने Vibe Z2 Pro 2K डिसप्ले के साथ लांच किया। परन्तु ये सारे मंहगे दामों पर लांच किए गए। इस साल 2K थोड़ा सस्ते होने की पूरी उम्मीद है। हमें 4K (4096 × 3072 पिक्सल) डिसप्ले रिज़ोल्यूशन दिखाते उत्पाद भी दिखेंगे इस साल, हालांकि ये अभी महंगे ही रहेंगे।

 

2. मानें ना मानें कर्वड फ़ोन आ रहे हैं

 

2013 में सैमसंग और एलजी ने दो फ़ोन लांच किए जो कर्वड डिसप्ले के साथ थे। दोनों ने ही डिसप्ले पैनल के साथ छेड़-छाड़ करने की बजाय फ़ोन की पूरी बॉडी को ही मोड़कर कर्वड रुप देना सही समझा। परन्तु 2014 में सैमसंग ने गैलैक्सी नोट एज लांच कर दिखा दिया कि बॉडी को बनाए रखते हुए वह सिर्फ डिसप्ले पैनल को मोड़कर एक नया ही गैजेट तैयार कर सकता है।

एक दूसरी ख़बर के अनुसार इस कोरियाई कंपनी ने बहुतायत में ओएलईडी डिसप्ले का उत्पादन शुरू कर दिया है, जिसे हम इसके आनेवाले फ़ोन और टैबलेट में देख सकेंगे (शायद साल के अंत तक)। मार्च के महीने में यह कंपनी गैलैक्सी S6 लांच कर सकती है, जिसमें गैलैक्सी नोट एज से आगे बढ़ते हुए हम दो तरफ़ से मुड़े डिसप्ले स्क्रीन देख सकते हैं।

पर वाकई ऐसे गैजेट जिन्हें हम फ्लैक्सीबल या फोल्ड कर सकनेवाले हैन्डसेट कह सकें, उनके लिए अभी हमें इंतज़ार करना पड़ेगा। 2016 तक इस प्रकार के गैजेट बाज़ार में आने की पूरी उम्मीद है।

 

3. बहुत हो गया स्टॉक एंड्रॉएड 

 

पिछले कुछ वर्षों से बहुत सी भारतीय कंपनियां स्टॉक एंड्रॉएड यानि कि बिना किसी लीपा-पोती के, एंड्रॉएड  ओएस पर आधारित फ़ोन लांच करती आ रही हैं। सस्ते दामों में फ़ोन उपलब्ध कराने के लिए यह ज़रुरी भी है। परन्तु इससे ख़रीदार को कोई ख़ास लाभ नहीं मिल पाता। मिसाल के लिए यदि पांच कंपनियां पांच अलग-अलग फ़ोन स्टॉक एंड्रॉएड के साथ लांच करती हैं तो ख़रीदार के लिए इनमें से किसी भी फ़ोन के इस्तेमाल का अनुभव समान ही होगा।

अतः कंपनियों के लिए अगला बड़ा कदम होगा अपने ग्राहकों कुछ नया और अलग दे पाना। इस दिशा में नया यूज़र इंटरफ़ेस या नया ओएस लाना लाज़मी हो जाता है, जो अपनी ख़ुद की अलग पहचान बनाने में मददग़ार हो।

सैमसंग टाइज़न ज़ी1

सैमसंग टाइज़न ज़ी1

सैमसंग बाजा़र में नेचर यूज़र इंटरफ़ेस के साथ एंड्रॉएड  ओएस पर आधारित फ़ोन लाती है। हालिया नक्त में इसमे तय किया है कि उसे अब एंड्रॉएड  से आगे बढ़ने की ज़रूरत है। कंपनी का सारा ध्यान अब टाइज़न नाम के नए ओएस पर है जिस को आधार बनाकर इसने स्मर्टवॉच और टीवी लांच किए हैं।

साल 2014 के मध्य से माइक्रोमैक्स ने एंड्रॉएड ओएस के साथ अधिक फीचर्स देने शुरु किए (इन्हें हम अभी नया यूज़र इंटरफ़ेस नहीं कह सकते।) साल के अंत तक कंपनी ने यूरेका वाईयू साइनोजेन मॉड फ़ोन भारत में लांच कर दिया। 2015 में उम्मीद है कि कंपनी और नए फीचर्स लेकर आएगी, नए यूज़र इंटरफ़ेस की आस लगाना भी ग़लत नहीं होगा।

ज़ोलो ने अपना ख़ास हाईव यूज़र इंटरफ़ेस 2014 में ही लांच कर दिया, जिसके बाद आशा है कि स्पाइस, लावा, कार्बन और मैक्स भी अपने नए यूज़र इंटरफ़ेस पर काम करना शुरू कर दें।

सॉफ्टवेयर के बाद यदि हम हार्डवेयर की बात करें तो हमें और उपभोक्ताओं की ज़रूरत अनुसार फ़ोन भी 2015 में देखने के लिए मिलेंगे। गूगल ने फ़ोनब्लॉक का पहला काम-करनेवाला मॉडल बना लिया है और इस वर्ष के खत्म होने से पहले बिक्री के लिए इनहें बाज़ार में उतार देगा।

अफ़वाहों की मानें तो शियोमी और ज़ेडटीई भी इसी तरह के उपभोक्ता-अनुरूप फ़ोन लाने की ज़द्दोज़हद में लगे हुए हैं। साल के अंत तक इनकी ओर से भी नई घोषणा की अटकलें लगाई जा सकती हैं।

 

4. धांसू प्रोसेसर

 

साल 2013 में सैमसंग और 2014 में मीडियाटेक ने बाज़ार में ऑक्टा-कोर प्रोसेसरवाले फ़ोऩ उतारे। इस प्रोसेसर के साथ आए फ़ोन महंगे ही रहे परन्तु 2014 तक यो फ़ोन सस्ते होने शुरू हो गए।

प्रोसेसर के खेल में बड़ा मोड़ तब आया था जब एप्पल ने सितम्बर 2013 में 64-बिट प्रोसेसर के साथ आईफ़ोन 5S और 5C लांच किया। इसी प्रोसेसर के साथ बाद में साल 2014 में आईफ़ोन 6 और 6 प्लस लांच किए गए। इस प्रोसेसर ने जैसे मार्केट का रूख़ ही पलटकर रख दिया।

अप्रैल 2014 में क्वॉलकॉम ने तथा जुलाई 2014 में मीडियाटेक ने 64-बिट प्रोसेसर की घोषणा कर दी। 2015 में क्वॉलकॉम स्नेपड्रैगन 600 सीरीज़ में बेहद तगड़े दो प्रोसेसर लेकर आ रहा है। सभी से आगे बढ़ते हुए सैमसंग ने फरवरी 2014 में ही 64-बिट प्रोसेसर की घोषणा कर दी जिसका इस्तेमाल इसने गैलेक्सी नोट 4 में किया। एल जी भी अपने फ़ोन का प्रोसेसर खुद ही बनाना चाहता है। अक्तूबर 2014 में सैंमसंग की प्रतियोगी इस कंपनी ने 64-बिट न्यूक्लन प्रोसेसर की घोषणा की।

इस दिशा में हो रहे काम को देखते हुए कहना मुनासिब होगा कि इस साल लांच होनेवाले महंगे फ़ोनों में हम क्वॉड-कोर या ऑक्टा-कोर 64-बिट प्रोसेसर देखेंगे, और सस्ते फ़ोनों में ऑक्टा-कोर 32-बिट प्रोसेसर और क्वॉड-कोर प्रोसेसर देखेंगें।

 

5. कैमरे में क्या होगा खास?

 

10,000 रुपये से नीचे मिलनेवाले फ़ोनों में 8 मेगापिक्सल और 6000-7000 रूपये से कम दाम में मिलनेवाले फ़ोनों में 5 मेगापिक्सल कैमरे 2014 में छाए रहे (इनमें कुछ अपवाद रहे)। परन्तु 2014 में 20.7 मेगापिक्सल कैमरे वाले फ़ोन कुछ महंगे ही रहे। फ्रंट कैमरे की बात करें तो 8 मेगापिक्सल और 5 मेगापिक्सल वाइड एन्गल लेंस के सेल्फी कैमरे फ़ोनों ने भी ग्राहकों को खूब लुभाया।

2015 में आशा करते हैं कि 10,000 रुपये से नीचे मिलनेवाले फ़ोनों में हमें 13 मेगापिक्सल कैमरे और महंगे फ़ोनों में 20.7 मेगापिक्सल या इससे अधिक के कैमरे देखने के लिए मिलेंगे। यही नहीं फोटोग्राफ़ी का शौक रखनेवालों का लिए ख़ास कैमरों जैसे कि 4के कैमरे के साथ फ़ोन बाज़ार में उतारे जाएंगे।

सोनी ने 2014 में 21 मेगापिक्सल Exmor RS IMX230 कैमरा सेन्सर बनाया है जो कि 4K डिस्पले रिज़ोल्यूशन में वीडियो ले सकता है। मार्च के महीने में लांच होनेवाले एक्सपीरिया Z4 में इस कैमरा सेंसर के होने की अटकलें हैं। सोनी के जवाब में ओम्नीविज़न ने 2014 में 23.8 मेगापिक्सल और 2.4 मेगापिक्सल तक फोटो ले सकनेवाला OV23850 कैमरा सेन्सर लांच कर दिया है, जिसके भी इसी साल फ़ोन में आने की उम्मीद है।

2013 में सैमसंग एनालिस्ट में दिखा गए रोडमैप के अनुसार कंपनी अभी 16 और 20 मेगापिक्सल के फ़ोन कैमरों पर काम कर रही है। 2014 में गैलेक्सी S5 और गैलैक्सी नोट 4 में 16 मेगापिक्सल का कैमरा था। 2015 में सैमसंग 20 मेगापिक्सल कैमरा फ़ोन लांच कर सकती है।

यहां यह बताना भी महत्वपूर्ण है कि 2015 में क्वॉलकॉम स्नेपड्रैगन 600 सीरीज़ में जो दो प्रोसेसर लेकर आ रहा है, इनमें फ़ोन में 3D चित्र ले सकने के लिए 21 मेगापिक्सल स्टिरियोस्कोपिक कैमरे भी चलाए जा सकते हैं।

 

6. सस्ते और बेहद सस्ते फ़ोन

 

इंटरनेट से दूर विश्व की अन्य 1 ख़रब जनता को इंटरनेट से जोड़ने की कवायद ने 2014 में तेज़ी पकड़ी है। इसका एक महत्वपूर्ण कारण है भारत जैसे देशों में ऐसे फ़ोन सस्ते में उपलब्ध हो पाना जो इंटरनेट से कनेक्ट हो सकें। इस दिशा में बढ़ते हुए गूगल ने एक ओर एंड्रॉएड  वन लांच किया तो देशी कंपनियों ने जव़ाब में सस्ते फ़ोनों की जैसे झड़ी ही लगा दी।

मोटोरोला की मोटो ई और जी, नोकिया एक्स और बाद में लूमिया 625, इधर शियोमी का रेडमी 1S और नोट, मोज़िला का फायरफ़ॉक्स फ़ोन, एलजी और एचटीसी के सस्ते फ़ोन सब जैसे एक ही बड़ी-सी रेस का हिस्सा थे। माइक्रोमैक्स, कार्बन, लावा, इन्टेक्स, सेलकॉन, आईडिया, ज़ोलो, डाटाविंड, विकेडलीक्स आदि कंपनियां ने भी इस रेस का हिस्सा बन प्रतिस्पर्धा बढ़ाई। सोनी और सैमसंग ने भी थोड़े सस्ते फ़ोन बाज़ार में उतारने में भलाई समझी।

परन्तु मोज़िला का फायरफ़ॉक्स फ़ोन की तरह और उसके बाद इन्टेक्स के इक्का-दुक्का फ़ोन के सिवा कोई भी 3,000 रूपये से कम में फ़ोन लांच नहीं कर पाया। परन्तु साल 2015 में इस आंकड़े के बदलने के आसार हैं। उम्मीद है कि 3,000 रूपये से कम में ड्यूअल-कोर फ़ोन लांच होंगे जिसके बाद अधिक से अधिक लोग इंटरनेट से जुड़ेगें।

 

7. एंड्रॉएड  अपनी प्रभुता कायम रखेगा, परन्तु इतनी आसानी से नहीं।

 

यदि हम 2011, 2012, 2013 और 2014 के ऑपरेटिंग सिस्टम के आंकड़ो को देखें तो पता चलता है कि एंड्रॉएड  ने अबाध्य तरक्की की है।

(स्रोतः आईडी के क्वार्टर 2 के आंकड़े)

(स्रोतः आईडी, दूसरी तिमाही 2014 के आंकड़े)

आईडीसी द्वारा जारी किए गए तीसरी तिमाही, 2014 के आंकड़ो के अनुसार दुनिया की 5 बड़ी पर स्मार्टफ़ोन  कंपनियां है- सैमसंग, एप्पल, शियोमी, लेनोवो और एलजी हैं। इनमें से एप्पल को छोड़ कर सभी एंड्रॉएड  ओएस (39 प्रतिशत मार्केट शेयर) पर हैं, जबकि एप्पल जो आईओएस का इस्तेमाल करता है,उसके पास मात्र 11.7 प्रतिशत मार्केट शेयर है।

भारतीय बाज़ार की ओर निगाह फ़ेरें तो सबसे अधिक हैण्डसेट बेचने वाली कंपनियां हैं सैमसंग, माइक्रोमैक्स, लावा, कार्बन और मोटोरोला, ये पांचों कंपंनियां एंड्रॉएड  ओएस का इस्तेमाल करते हुए बाज़ार में अपना रुतबा कायम किए हुए हैं। इन 5 कंपनियों के पास बाज़ार का 65 प्रतिशत हिस्सा है।

लोगों ने एंड्रॉएड  को ख़ूब अपनाया है वहीं आईओएस को कम ही लोगों ने अपनाया है, ब्लैकबेरी और विंडो ने भी कोई ख़ास तरक्की नहीं की। परन्तु 2014 के सितम्बर के बाद से आईफ़ोन की बिक्री में कुछ तेज़ी दर्ज की गई। हम यह भी कह सकते हैं कि चीन के बाजा़र में एप्पल के आने से एंड्रॉएड  को तगड़ी चुनौती मिली है।

अन्य ओएस की बात छेड़ें तो साल के खत्म होने से पहले माइक्रोसॉफ्ट ने दुनिया के सामने अपने नया और एकदम अलग विंडो 10 रख दिया। एप्पल सिरी की ही तरह कोरटोना वाइस एसिसटेंट के साथ यह नया ऑपरेटिंग सिस्टम 2015 के अंत तक आएगा। हालांकि अभी से कुछ कहना मुनासिब न होगा, बिल गेट्स कंपनी के साथ हमें भी इस नए ओएस से काफी उम्मीदें हैं।

कनाडा की कंपनी ब्लैकबेरी, पासपोर्ट, क्लासिक और अन्य कई हैण्डसेटस् में डाटा सुरक्षा के साथ मार्केट में दोबारा वापसी करता दिखती है। यह तो नहीं कह सकते कि ब्लैकबेरी अभी पूरी तरह एंड्रॉएड को टक्कर देने की स्थिति में है परन्तु जैसा आज से वर्षभर पूर्व जान पड़ता था, यह कंपनी अभी पूरी तरह डूबी भी नहीं। 2015 में, ब्लैकबेरी के सैमसंग ख़ेमे में जाने का आसार हैं, जिसके बाद इस साल खेल देखने लायक होगा।

मोटे तौर पर यह कह सकते हैं कि 2015 एंड्रॉएड  का ही साल रहेगा पर दमख़म के साथ नए ख़िलाड़ी उभरते नज़र आएंगे।

 

Nismo smartwatch

निस्मो स्मार्टवॉच

8. वियरेबल होंगें पहुंच के भीतर

 

2014 में अनेक कंपनियों ने घड़ी के आकार में अपने वियरेबल लांच किए, परन्तु सस्ते वियरेबल देख़ने को नहीं मिले। स्पाइस पल्स एम9010 का ख़ास ज़िक्र करना बनता है क्योंकि यह एक ही स्मार्टवॉच थी जो 2014 में 3,999 रूपये में लांच की गई। बाकि सैमसंग का गैलेक्सी गियर, गैलेक्सी गियर 2, नियो, एलजी के ज़ीवॉच, मोटोरोला मोटो360, एसूस ज़ेनवॉच- लगभग सभी नए उत्पाद मंहगे ही रहे, यानि कि 15,000 रुपये से अधिक ही रहे।

2015 में एप्पल आईवॉच समेत दर्जनों नए स्मार्टवॉच लांच किए जाएंगे जिनमें से बहुत से एंड्रॉएड  वियर पर आधारित होंगे। वियरेबल के साथ गूगल ने नए डेवेलपर्स के लिए एंड्रॉएड  वियर नाम से एक नया ओएस डेवलपर्स के लिए मुहैया कराया है जिसके बाद 2015 के आख़िर तक इनके दामों में कुछ कमी आने की
संभावना है।

 

9. क्या होगी अधिक रैम?

 

2014 में 10,000 रुपये से कम क़ीमत में ऐसे कई सस्ते फ़ोन आए जिनमें रैम 1GB तक थी। साल के अंत तक 10,000 रुपये से कम कीमत पर ऐसे फ़ोन आने लगे जिनमें हमें दोगुनी रैम देखने को मिली जैसे 9,999 रुपये में एसूस ज़ेनफ़ोन 5 और सेलकान् सिलेनियम अल्ट्रा Q50 एवं 13,999 रुपये में ज़ोलो प्ले 8X-1100। लेकिन 9,999 रुपये की सीमा 2014 में लांघ ना सकीं स्मार्टफ़ोन कंपनियां। 2015 में इस गणित के बदलने के पूरे आसार हैं। आनेवाले महीनों में हमें 700 रूपये से 10,000 रूपये के बच ऐसे फ़ोन खरीदने के लिए मिलेंगे जिसनें बेहतर और तेज़ प्रोसेसिंग को सपोर्ट करता 2GB रैम होगी।

फ्लैगशिप फ़ोन की बात करें तो कमसकम 3GB या 4GB से कम रैम की उम्मीद रखना सही होगा, क्योंकि अधिकतर कंपनियां अधिक रैम और 64-बिट क्वालकॉम या ऑक्टा-कोर प्रोसेसर के इर्द-गिर्द ही अपने फ्लैगशिप फ़ोन बाजा़र में उतारेंगी। सोनी 4GB के साथ एक्सपीरिया ज़ी4 ला सकता है, सैमसंग इतने ही रैम को लेकर गैलेक्सी S6 और नोट 5 मार्केट में उतार सकता है। एचटीसी के भी 3GB रैम के साथ वन M9 लाने की उम्मीद है।

एप्पल की बात ठीक-ठीक कह पाना थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि जब अन्य कंपनियां इस साल अधिक रैम का सोच रही थीं, स्टीव जाब्स की कंपनी 1GB रैम के साथ आईफ़ोन लांच कर रही थी।

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