10 point charter for Selection of Smart Cities

January 18, 2015 Leave a comment

For the selection of Smart Cities in India, the government would ensure a 10-point charter. It will rate cities based on sanitation and credit worthiness for this.

1. City Master Plans wherever due and City Sanitation Plans

1. City Master Plans wherever due and City Sanitation Plans

2. Long Term Urban Development Plans for district headquarters focusing on an area of 25 km radius

3. Long Term City Mobility PlansCity specific strategies for promotion of renewable energy sources like solar and

4. City specific strategies for promotion of renewable energy sources like solar and wind power, waste to energy etc.

5. Regulatory bodies for pricing of utilities like water and power and assessment and revision of taxes from time to time to enhance resource baseTaking necessary initiatives for assessing credit worthiness of each city to mobilise resources from appropriate sources;

6. Taking necessary initiatives for assessing credit worthiness of each city to mobilise resources from appropriate sources

7. Promotion of water harvesting and water recycling on a large scale through necessary provisions by revising Building Bye-laws in line with emerging needs of cities and aspirations of people. Promoting citizens in urban planning , decision-making and management;

8. Promoting citizens in urban planning, decision-making and management, Capacity building in key disciplines; and

9. Capacity building in key disciplines10.Improving urban governance through adoption of ICT platforms to ensure accountability and transparency besides online delivery of various services.

10. Improving urban governance through adoption of ICT platforms to ensure accountability and transparency besides online delivery of various services.

See the press release: http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=114695

FM Phase-Ill auctions and migration

January 18, 2015 Leave a comment
Here is the PIB press release about Conduct of FM Phase-Ill auctions and migration (renewal) of Private FM Radio licenses from Phase-II to Phase-Ill
The Union Cabinet chaired by the Prime Minister, Shri Narendra Modi, today gave its approval for conduct of FM Phase-Ill auctions and migration (renewal) of Private FM Radio licenses from Phase-II to Phase-Ill in 69 existing cities for 135 channels. This will be on an ascending e-auction basis. Approval was also given to migration (renewal) of private FM Radio licenses from Phase-II to Phase-Ill on payment of migration fee according to TRAI recommendations.

As of now, with the implementation of two phases of private FM Radio, namely Phase I (1999-2000) and Phase II (2005-06), there are 243 private FM channels in operation in 86 cities of the country, spanning 26 States and 3 Union Territories.

The auction process will add an estimated revenue of over Rs. 550 crore to the National Exchequer on successful auctions of all proposed channels. Besides, it will beget the amount realized through the migration process which is dependent on the TRAI recommended formula, where migration fee is linked with the discovery of market prices through the FM Radio Phase III auction.

Roll out of the first batch of FM Radio Phase III auction will provide more channels to listeners with richer content in 69 existing cities.

बनारस को क्योटो बनाने की तैयारी शुरु, पहली बैठक सम्पन्न

January 15, 2015 Leave a comment
1883 में बनारस

1883 में बनारस

प्राचीन शहर वाराणसी (बनारस) को हाई-टेक शहर क्योटो बनाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। इस हफ्ते क्योटो-वाराणसी संचालन समिती की पहली बैठक के साथ पहला यह प्रक्रिया अब शुरु कर दी गई है।

पहली बैठक में दोनों शहरों में समानताओं पर बातचीत हुई और प्राचीन शहर की ऐतिहासिक समृद्धि और संस्कृति को ध्यानमें रख कर पर्यटन और विकास की दिशा में कैसे प्रगति की जाए इस विषय पर चर्चा की गई।

दोंनों शहरों के बीच मौजूद समानताओं पर चर्चा हुई जिसमें से एक है यह दोनों शहर हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी तरफ खींचते हैं। जहां सालाना 500 लाख पर्यटक क्योटो शहर (जिसे एक हज़ार तीर्थ स्थलों को शहर भी कहते हैं) आते हैं वहीं तकरीबन 50 लाख पर्यटक भातर के मंदिरों के शहर वाराणसी में गंगा के घाट घूमने आते हैं।

क्योटो शहर के विकास की पहल के तहत – संस्कृति की सुरक्षा, शहरी नियोजन में खास बदलाव, शहरी कूड़े में कमी करना तथा उसका उचित निपटारा करना, सड़कों में विज्ञापन  लगाने पर पूरी तरह रक लगाना, नदी तटों का विकास जैसे पदक्षेप शामिल किए गए थे।

साथ ही जैव उर्जा का विकास, जैव उर्जा उत्पादन संबंधित प्रकल्प लगाना, कूड़े से उर्जा (बिजली) बनाने की तकनीक का इस्तेमाल, घर से निकलने वाले कूड़े और म्यूनिसिपल कूड़े का उचित उपचार संबंधित प्रकल्पों का लगाना भी शामिल हैं।

वाराणसी को क्योटो बनाने की इस कवायद में भारत क्योटो से सीख लेते हुए, दोनों राष्ट्रों के बीच साथ में काम कर सकनेपर विचार होगा। दोनों राष्ट्रों के मध्य आर्थिक, तकनीकी और संस्थागत साझेदारी से यह विकास संभव होगा।

चित्र आभार:1883 में बनारस, एडविन लॉर्ड वीक्स

4के टीवी के लिए 4के सेट-टॉप-बॉक्स  

January 11, 2015 Leave a comment
Samsung 4K curved TV

Samsung 4K curved TV

4के टीवी खरीदने वालों को अब पिक्चर क्वालिटी पर कोई समझौता नहीं करना पड़ेगा। 4के टीवी के लिए खास तौर पर इस्तेमाल किये जाने के लिए टाटास्काई ने लाँच किया है, नया  4के सेट-टॉप-बॉक्स।

अब तक 4के टीवी खरीदने वालों को फुलएडी (1080 X 1920 पिक्सल डिस्पले रिज़ोल्यूशन) सेट-टॉप-बॉक्स के साथ ही काम चलाना पड़ता था। अब 6,400 रुपये दे कर नए उपभोक्ता 4के सेट-टॉप-बॉक्स खरीद सकते हैं। मौजूदा उपभोक्ताओं थोड़ी-सी छूट दी गई है, 5,900 रुपये में मौजूदा उपभोक्ता यह फुलएडी के चार गुना अच्छी पिक्चर क्वालिटी का लाभ उठा सकते हैं।

इन्टरनेशनल कन्ज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक शो, 2014 में टीवी बनानेवाली कम्पनियों ने पहली बार 4के टीवी (यानि 3840 x 2160 पिक्सल डिस्पले रिज़ोल्यूशन) दुनिया के आगे पेश किऐ। उसके बाद साल के मध्य तक ये टीवी बिक्री के लिए आए, परन्तु केवल एक कंपनी ने कोरिया, जापान और भारत में इसे लाँच किया, काफी महंगे दामों पर। साल के खत्म होने से पहले (अगस्त में) अन्य कम्पनियाँ भी प्रतिस्पर्धा में उतरीं और इनकी बिक्री शुरु हुई और इनके दाम कम होने शुरु हुए।

Spectrum Auction to begin from 25th February

January 11, 2015 Leave a comment

Notice Inviting Applications (NIA) for auction of Spectrum in 2100 MHz, 1800 MHz, 900 MHz and 800 MHz bands was issued by the Department of Telecommunications on 09-01-2015.

  • The details of 2100 MHz bands would be announced later.
  • Spectrum has been put on offer in 15 Service Areas (SAs) in 1800MHz band, 17 SAs in 900MHz and 20 SAs in 800MHz band.
  • Block size is 200 KHz (Paired) in 900 MHz & 1800 MHz bands; and 1.25 MHz (Paired) in 800 MHz band.
  • Validity of Spectrum in this auction shall be 20 years.
  • There is also option of deferred payment.
  • The auction format is simultaneous, multiple-round ascending auction.
  • NIA contains detailed terms and conditions regarding reserve price, pre-qualification conditions, Earnest Money Deposit (EMD), Auction Rules etc.
  • The last date for submission of application is 6th February 2015.
  • Auction is scheduled to commence on 25th February, 2015 and will be conducted on-line on URL- https://dot.mjunction.in
  • Total Spectrum put to auction is 103.75 MHz in 800 MHz band, 177.8 MHz in 900 MHz band and 99.2 MHz in 1800 MHz band.

कानों को नुकसान पहुंचा सकता है तेज़ आवाज़, जानिए बचने के 4 तरीके

January 10, 2015 Leave a comment
हेडफ़ोन पर संगीत का मज़ा लेती सोनाक्क्षी सिन्हा; चित्र साभार सोनाक्क्षी सिन्हा के ट्विटर पोस्ट से

हेडफ़ोन पर संगीत का मज़ा लेती सोनाक्क्षी सिन्हा; चित्र साभार सोनाक्क्षी सिन्हा के ट्विटर पोस्ट से

तेज़ आवाज़ कान को पर्दों को हानि पहुंचा सकता है या नहीं यह काफ़ी समय से चर्चा का विषय बना रहा है। एप्पल आईपैड और अन्य म्यूज़िक गैजेट के आने के बाद से इस चर्चा में तेज़ी ही आई है।

हाल के वर्षों में फोन और टेबलट पर गाना सुनना जैसे एक आम बात बन गई है। ऐसे में यह जानना ज़रुरी हो जाता है कि क्या ऊंची आवाज़ में म्यूज़िक (संगीत) सुनने पर कानों के पर्दों को वाकई नुकसान पहुंच सकता है? यदि हां, तो इससे कैसे बचा जाए।

2014 में डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संस्थान) द्वारा प्रकाशित इयर केयर मैनुअल (कान की देखभाल विषय पर पुस्तिका) में बताया गया है कि ऊंची आवाज़ कान के पास बजने से श्रवणशक्ति पर असर पड़ सकता है। इस मैनुअल के अनुसार “कान के पास बजनेवाले तेज़ संगीत का समय बढ़ने पर बहरेपन का ख़तरा भी बढ़ जाता है। ऐसा देखा गया है कि, इयरफ़ोन या हेडफ़ोन पर अधिकतम वोल्यूम पर 5 मिनट से अधिक देर संगीत सुनने पर श्रवणशक्ति पर बुरा असर पड़ता है। इससे बचने के लिए संगीत सुनते वक्त के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लिया जाना उचित है।” पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

2014 में गार्डियन अख़बार में छपे एक रिपोर्ट में कान पर तेज़ ध्वनि के असर को विस्तार से समझाया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार “तेज़ आवाज़ से कान के अंदरुणी हिस्से के सूक्ष्म बालों, जिन्हें स्टेरियोसिलिका कहते हैं, उन्हें क्षति पहुंचाता है- जिसके कारण बहरेपन का ख़तरा पैदा हो जाता है। तेज़ ध्वनि से स्टेरियोसिलिका में कंपन पैदा होता है, जिससे उनमें संचारित वोल्टेज में बदलाव आता है। इस बदलाव की ख़बर तंत्रिकाएं ब्रेन तक पहुंचाती हैं।” इस रिपोर्ट के अनुसार, स्टेरियोसिलिका में लगातार कंपन पैदा कर वोल्टेज में बदलाव करने से बहरापन हो सकता है।

ऊंची ध्वनि से कानों को नुकसान पहुंचता है जानते हुए भी सफ़र के दौरान या काम करते समय संगीत सुनना आज हमारी आदत बन चुका हैं। ऐसे में क्या करें कि हमारे कानों को कोई नुकसान ना पहुंचे। हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ तरीके –

1.  85 डेसिबल (ध्वनि को डेसिबल में मापा जाता है) से अधिक उंची ध्वनि में संगीत ना सुनें।

पोरटेबल स्पीकर्स

पोरटेबल स्पीकर्स

2. मोबाइल या टैबलेट पर संगीत सुनने की बजाय अपने साथ छोटे ब्लूटूथ या दूसरे स्पीकर ले रखें, और इनका इस्तेमाल करें।

3. काफ़ी देर तक हेडफोन लगा कर संगीत ना सुनें, बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। ऑस्टियोपैथिक पेडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) डॉ जेम्स इ, फॉय के अनुसार एक दिन में एमपी3 प्लेर या किसी भी अन्य गैजेट पर संगीत 60 मिनट से अधिक देर नहीं सुनना चाहिए। (स्त्रोत: अमरिकन ऑस्टियोपैथिक एसोसिएशन)

4. क्या आपने ऑटोमैटक वाल्यूम लेवलर के बारे में सुना है? यह गैजेट ध्वनि के प्रेशर को एक निश्चित सीमा के अंदर रखने में मदद करता है। कई कारों में यह सुविधा होती है, जहां ये लेवलर कार की गति के साथ संगीत या रेडियो की ध्वनि को घटाता या बढ़ाता है।

ISPs to Alert people who deal with Pirated Content

January 3, 2015 Leave a comment
copyright Infringemnet

copyright Infringement

A new law in Canada now requires ISPs and VPNs are needed to issue alert to consumers who are dealing with pirated content.

This means the ISPs will track the user behavior related to copyright content and will issue copyright infringement notices to user is if the user downloads or probably such content. This means (1) user behavior will be monitored (2) ISPs won’t be liable for enabling the user to connect to such content already available on websites(3) users who use non-commercial file-sharing for propagation of content and information will face damages.

Source 1